Why Do Parents Discriminate
माता पिता बच्चों में भेदभाव क्यों करते हैं ?
घर में कलह होने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन असली बजह माता पिता का अपने बच्चों के प्रति भेद भाव (DISCRIMINATION) होता है जो समय के साथ बड़ा होकर कई मुसीबतों को जन्म देता है। माता पिता अपने बच्चों में भेद भाव जान बूझ कर नहीं करते , इसके लिए कई परिस्थितियां और मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं।
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जिन लोगों के साथ भेद भाव (DISCRIMINATION) होता है वे शायद यही सोचते होंगे कि मुझमें ऐसी क्या कमी है जिसकी वजह से मेरे मां बाप हमें उतना प्यार नहीं करते जितना कि दूसरे भाई या बहनों को।
घर में एक बच्चे को ज्यादा प्यार क्यों मिलता है ?
यदि आपका व्याहार अपने माता पिता और भाई बहनों के साथ ठीक है फिर भी यदि आपके साथ आपके मां बाप भेद भाव करते हैं तो इसके लिए निम्न कारण हो सकते हैं।
- स्वभाव का फर्क : एक ही मां बाप के कुछ बच्चे शांत और आज्ञाकारी होते हैं और कुछ गुस्सैल या किन्ही दूसरे दुर्गुणों से भरे होते हैं जिससे वे शांत और आज्ञाकारी बच्चे को ज्यादा पसंद करते हैं और दूसरे बच्चों को लगता है कि उनके साथ भेद भाव हो रहा है।
- छोटा या कमजोर बच्चा : अक्सर देखा जाता है कि जो बच्चा छोटा या कमजोर हो उस बच्चे की तरफ माता पिता का ज्यादा ध्यान रहता है क्योंकि उन्हें डर लगता है कि उनका छोटा या कमजोर बच्चा अन्य बच्चों से पीछे न रह जाए।
- समझदार बच्चे : अक्सर वे बच्चे ही उपेक्ष या भेद भाव के शिकार होते हैं जो ज्यादा समझदार होते हैं क्योंकि माता पिता सोचते हैं कि यह तो सब अपने आप कर लेता है तो इसकी क्या परवाह करना। वे उन बच्चों के भविष्य के प्रति ज्यादा सजग रहते हैं जो गैर जिम्मेदार, कम समझदार होते हैं। इससे दूसरे बच्चों को लगता है कि उनके साथ भेद भाव हो रहा है।
- आर्थिक या सामाजिक सोच : कुछ माता पिता यह सोचते हैं कि जिस बच्चे की आर्थिक स्थिति ठीक है उसके साथ रहेंगे तो उन्हें भी कभी आर्थिक संकट नहीं होगा। उनका बुढ़ापा सही से कट जाएगा।
- सही ज्ञान का अभाव : कुछ माता पिता व्यर्थ की चिंता से घिरे रहते हैं जैसे पता नही बुढ़ापे में मेरे साथ क्या होगा, मेरा बुढ़ापा कैसे कटेगा,यह बच्चा बुढ़ापे में मेरी सहायता नही करेगा । इससे वह एक बच्चे से दूसरे बच्चों की तुलना करने लगते हैं। तुलना करने से बच्चों में दूरी और जलन पैदा होती है। मां बाप को इस बात का ज्ञान नही होता कि आप चाहे लाख जतन कर लो अगर पूर्व किए हुए कर्म सही नही रहे तो कोई भी बच्चा आने वाले संकट से उन्हें नही बचा सकता और इसके विपरीत यदि जीवन में उन्होंने सही कार्य किए हैं तो उनको कोई तकलीफ भी नही होगी। दरअसल में उन्हे न अपने उपर भरोसा होता है,न ईश्वर पर भरोसा होता है और न ही अपने बच्चों पर।
परिवार को टूटने से कैसे बचाएं ?
माता पिता के भेदभाव का बच्चों पर असर
माता पिता के भेद भाव के कारण घर में कलह शुरू हो जाता है। जो समय के साथ बढ़ता ही जाता है। भाई भाई का दुश्मन बन जाता है। कोई एक दूसरे का मान सम्मान नही करता। गुस्सा और अहंकार इतना बढ़ जाता है कि मार पीट की नौबत तक आ जाती है। परिवार के टुकड़े टुकड़े हो जाते हैं। कई बार स्थिति बड़ी भयानक हो जाती है। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हो जाता है।मां बाप का थोड़ा सा भेद भाव बच्चों के दिल में जिंदगी भर का दर्द छोड़ सकता है ।
अगर किसी बच्चे के साथ भेदभाव हो रहा हो तो उसे क्या करना चाहिए ?
- खुद को बेकार या कमजोर न समझो । किसी का कम प्यार मिलने से आपकी कीमत कम नही हो जाती।
- मां बाप से शांति से बात करो गुस्से या लड़ाई से नहीं।
- अपनी तुलना दूसरे भाई बहिनों से नहीं।
- अपनी पढ़ाई, काम, हुनर पर ध्यान देना चाहिए, एक वार आप पर भी पैसा आ गया तो सब समस्याएं खत्म समझो।
- अगर बहुत ज्यादा दुख, मानसिक परेशानी हो रही हो तो आध्यात्मिक किताबों को पढ़ना शुरू करें।
- आपको लगता है कि कोई खास व्यक्ति जैसे दादा दादी या अन्य आपकी मदद कर सकता है तो उसकी मदद लें।
- अपने मन को शांत रखने का प्रयास करें और सोचें कि ईश्वर सर्व शक्तिमान है वह आपके साथ कभी गलत नही होने देगा।
- जब पैसे या रिश्तों में किसी एक को चुनना हो तो रिश्तों को ज्यादा महत्व देना चाहिए क्योंकि पैसा तो आप फिर भी कमा लेंगे लेकिन रिश्ता एक बार टूट जाए तो फिर उसमें बो बात कभी नहीं रहती।
- इसलिए रहीम दास जी ने कहा है कि
- रहिमन धागा प्रेम का,मत तोड़ो चटकाए। तोड़े से फिर न जुड़े, जुड़े गांठ पड़ जाए।
माता-पिता को क्या करना चाहिए ?
माता पिता को भी अपने सभी बच्चों में बराबर प्यार बांटना चाहिए। उन्हें सोचना चाहिए कि सभी बच्चे एक समान नही हो सकते, कुछ पढ़ने में अच्छे होंगे तो कुछ अन्य कामों में।
सोचने के नजरिए में बदलाव करना चाहिए। उनको ऐसे सोचना चाहिए कि यह पूरा जगत उस शक्तिशाली परमात्मा के अधीन है। यहां सब कुछ समान नही हो सकता, ईश्वर ने सबको अलग अलग कार्य के लिए बनाया है तो सबकी बुद्धि या विचार एक जैसे कैसे हो सकते हैं।
सोचों जब आप बड़े हो कर गलती करोगे तो फिर छोटों को कौन रोक सकता है।
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