Har Cheez Hone Ke Baad Bhi Insaan Dukhi Kyu Hai
Sab Kuch Hone Ke Baad Bhi Log Khush Kyu Nahi Rehte? (कड़वी हकीकत )
आज के समय में इंसान के पास सब कुछ है लेकिन फिर भी इंसान दुखी क्यों है ? इस दुख का क्या कारण है ? शायद आप नही जानते इस दुख का कारण हम स्वयं हैं। कुछ मामूली गलतियों की बजह से सब कुछ होते हुए भी हम अपना पूरा जीवन दुख में बिता देते हैं।
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👉Why people are unhappy ? ( Insan Dukhi kyu hai )
आज के समय में इंसान के पास हर चीज होने के बाद भी दुखी है। सुख दुःख का कारण कोई बाहरी वस्तु नही होती सिर्फ हमारे मन को जो अच्छा लगता है वही हमें मिल जाए या होने लगे तो कुछ पल के लिए हमें सुख का अनुभव होता है। मन प्रसन्न हो जाता है और हम कहते हैं कि हम सुखी हैं। लेकिन यदि मन के विपरीत कोई परिस्थिति आ जाए तो हमारा मन दुखी हो जाता है और हम कहते हैं कि हम बहुत दुखी हैं।
यदि आप इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ेंगे तो हम आपको गारंटी देते हैं कि आप जीवन में कभी दुखी नही होंगे। हमेशा खुश रहेंगे और सुखी रहेंगे।
इस उदाहरण को जरा ध्यान से पढ़ें और समझें।
मान लो एक व्यक्ति है जिसके दो लड़के हैं। वह अपने दोनों बच्चों को खूब लाड प्यार करता है। उसके बच्चे हमेशा खुश रहते हैं। वह जब भी कोई खाने पीने की वस्तु घर में लाता है तो दोनों को बराबर बराबर बाट देता है।
एक दिन वह व्यक्ति अपने बच्चों के लिए 3 खिलौने बाजार से लेकर आता है । अब 3 खिलौनों ही क्यों लाया ? क्योंकि दुकानदार के पास खुल्ले पैसे ही नहीं थे।
उस व्यक्ति ने 2 खिलौने अपने छोटे लड़के को दे दिए। बाकी बचा एक खिलौना, व्यक्ति ने अपने बड़े लड़के को दे दिया।
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अब क्या रिएक्शन होगा उन बच्चों का ??????
छोटा बच्चा तो खुच हो जाएगा क्योंकि उसको 2 खिलौने मिल गए। लेकिन अब सुख या दुःख जो भी होगा वह बड़े लड़के को होगा। यह इस बात पर डिपेंड करेगा कि बड़ा लड़का कितना समझदार है। उसकी थिंकिंग पावर कैसी है ?
मान लो उसने ऐसे सोचा कि चलो कोई बात नही, मेरे छोटे भाई को दो खिलौने मिल गए, मुझे भी तो एक खिलौना मिला। तो वह खुश रहेगा। क्योंकि उसकी थिंक पावर पॉजिटिव है।
और इसके विपरीत यदि उसकी थिंक पावर नेगेटिव हुई तो वह इस बात से खुश नहीं होगा। वह ऐसे सोचेगा कि मेरे पिता जी ने मेरे साथ अन्याय किया, मुझे एक ही खिलौना दिया , मेरे छोटे भाई को दो खिलौने दे दिए। वह अब दुख महसूस करेगा।
उसको मिला एक खिलौना अब उसे कोई खुशी नही दे पाएगा।
अब मान लो वह व्यक्ति सिर्फ 2 ही खिलौने लाता और दोनों बच्चों को एक - एक खिलौना दे देता। तब क्या परिस्थिति बनती ?
तब दोनों बच्चे खुश रहते। ऐसा क्यों ?
बड़े बच्चे को पहले भी एक खिलौना मिला था और अभी भी उसके पास एक ही खिलौना है लेकिन अब वह बहुत खुश होगा क्योंकि उसके छोटे भाई को भी एक ही खिलौना मिला है।
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इस से सिद्ध होता है कि कोई भी वस्तु हमें सुखी या दुखी नही करती। हमें सुख या दुख हमारी स्वयं की सोच से होता है। सोच पॉजिटिव होगी तो हमें हर छोटी बड़ी चीज में सुख मिल जाएगा।
लेकिन निगेटिव सोच वाले को पूरी दुनिया की सारी संपत्ति मिल जाए तो भी वह उसमें कोई न कोई कमी ढूंढ ही लेगा। इच्छाएं अनंत होती हैं। उनका कभी अंत नही हो सकता। एक को पूरा करोगे दूसरी हावी हो जाएगी, दूसरी को पूरा करोगे तो तीसरी हावी हो जायेगी।
आज का इंसान इसीलिए दुखी है क्योंकि वह अपने को कम देखता दूसरे की तरफ ज्यादा देखता है। अपने कमियों को नही गिनता, दूसरे में हजार कमियां निकल देगा। अपने पास जो है उसमें कोई खुशी नही है, दूसरों के पास इतना ज्यादा क्यों है इस बात का कष्ट उसे बहुत है।
लोग अपनी प्रॉब्लम पर फोकस करते हैं उसके सॉल्यूशन पर नहीं। नेगेटिव थिंक इंसान को और Unhappy 😭 बना देती है।
निगेटिव थिंक को पॉजिटिव कैसे करें इस टॉपिक पर मैंने इस डिटेल में पोस्ट लिखी है । जिसके लिंक नीचे है आप चाहे तो इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं।
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यदि आप हर समय Overthinking से परेशान हैं। आपके माइंड में अनेकों हर समय गलत विचार आते रहते हैं तो मन को कैसे शांत करें ? इस टॉपिक पर पूरी पोस्ट पढ़ें।
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ऊपर लिखे उदाहरण से आप समझ ही गए होगे कि जीवन में हम सुखी होंगे या दुखी। यह सब माइंड का गेम है जो इसको समझ गए वे कभी न सुखी होते हैं और न कभी दुखी होते हैं। क्योंकि किसी वस्तु या व्यक्ति से मिलने वाला सुख अस्थाई होता है। वस्तु है तभी तक सुख रहेगा, वस्तु नष्ट हुई दुख फिर से शुरू हो जाएगा।
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स्थाई सुख पाने के लिए आपको निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. ईश्वर की सत्ता में विश्वास: जो लोग ईश्वर में विश्वास नही करते हैं उनको कभी सुख या कभी दुख जरूर व्यापेगा। उसका कारण यह है कि उनको अपने इमोशन्स पर कंट्रोल ही नही होगा।
जैसे कोई व्यक्ति है जिसके लड़के की अभी अभी डेथ हो गई। तो यदि उसे ईश्वर की सत्ता में विश्वास होगा तो वह यह सोच कर अपना दुख कम कर लेगा कि जिंदगी और मौत तो ईश्वर के हाथ में है। जो पैदा हुआ है वह मरेगा जरूर। लेकिन जिसे ईश्वर में विश्वास नहीं है वह यह सब नही सोच पाएगा।
2. जितना है अपने पास उसी में संतोष: जितना अपने पास है उसी में संतोष करें। कुछ नया पाने की इच्छा जरूर करें लेकिन पूरी ईमानदारी के साथ मेहनत भी करें। किसी दूसरे के धन को देख कर हमेशा कुढ़ते रहना आपको और भी दुखी कर देगा।
3. अध्ययन: हमेशा अच्छी किताबें पढ़ें। अपने धर्म ग्रंथों का अध्ययन करते रहें। हमारे धर्म ग्रंथों में जीवन की उलझनों को बहुत ही बारीकी से समझाया गया है।
4. Overthinking या Negative think को धीरे धीरे कम करें: ज्यादा सोचना और नाकारात्मक सोच हमें कभी खुश नहीं रहने देगी।
5. किसी से ज्यादा आशा न रखें: कभी कभी आशा यानि अपेक्षा भी दुख का कारण बन जाती हैं। मतलब के इस दौर में दूसरों से जितनी अपेक्षाएं कम रखेंगे उतना ही ज्यादा सुखी रहेंगे।
6. किसी प्रकार के नशे की लत : यदि आप किसी प्रकार का नशा करते हैं तो उसे तत्काल बंद कर दें। नशा हमारा पैसा और शरीर दोनों को बर्बाद कर देगा। और जब पैसा और शरीर दोनों ही न बचें तो सुख की कल्पना करना भी व्यर्थ है।
7. लोन यानि ऋण: आज कल मार्केट में लोन सब्जी की तरह बिकने लगा है। आपके पास कुछ भी न हो लेकिन लोन आपको मिल जाएगा। भले ही ब्याज दर 80% हो। इतने लोन ऐप्स आ गए हैं जो लोगों को हर समय अपने चक्र बिहू में फसाने का प्रयास करते रहते हैं। व्यक्ति के एक बार फसने के बाद फिर वे अपना असली रूप दिखाते हैं। अतः लोन बहुत सोच समझ कर , बहुत जरूरी होने पर ही लें। लोन वाले कभी चैन से व्यक्ति को जीने नही देते।
किसी ने सच ही कहा है " कि ब्याज एक ऐसा घोड़ा है जिसकी रेस का आज तक कोई अनुमान नहीं लगा सका।"
8. तुलना बंद करो: किसी से अपनी तुलना मत करो। आप जो भी हैं ठीक हैं। न जाने कितने लोग आपसे नीचे का जीवन यापन कर रहे हैं । आपके हाथ पैर तो ठीक है न जाने कितने लोग ऐसे हैं जिनके हाथ पैर भी नही है। लेकिन वह अपनी जिंदगी मस्ती में गुजार रहे हैं।
9. वर्तमान में जिए: कल क्या होगा इसकी चिंता मत करो। जो हो रहा है वह ईश्वर की कृपा से हो रहा है और जो होगा वह भी ईश्वर की कृपा से अच्छा ही होगा। भविष्य की ज्यादा चिंता करना भी व्यक्ति को परेशान कर देता है। वर्तमान में जिए और मजे लें। खुश रहें।
10. समय की कीमत को पहचानो: कहते हैं Time is money.
अतः समय से हर काम पूरा करें और मन में पूरा विश्वास रखें कि हमें हमारे कर्म का फल जरूर मिलेगा। इससे आप आशावान बने रहेंगे और खुश रहेंगे।
खुशी को बाहर ढूंढना व्यर्थ है यह अंदर की चीज है। जैसे
कस्तूरी कुण्डल बसे, मृग ढूंढे वन माय।
मतलब: एक कस्तूरी मृग (हिरन) होता है जिसके माथे पर कस्तूरी निकल आती है जो बहुत ही खुशबू दार होती है।
अब जब वह खुशबू हिरन को अच्छी लगती है तो वह उसको ढूंढने के लिए वन वन में मारा मारा फिरता है लेकिन उसे वह कस्तूरी नहीं दिखती। जबकि कस्तूरी तो उसके सिर पर है और वह पूरे जंगल में उसे ढूंढता रहता है।
ठीक इसी प्रकार खुशी तो हमारे अंदर है लेकिन हम दूसरी वस्तुओं में खुशी की तलाश करते रहते हैं।
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