परिवार के मुखिया में कौन कौन से गुण होने चाहिए
नये जमाने के अनुसार परिवार के मुखिया में कौन कौन से गुण होने आवश्यक हैं ?
तुलसी दास जी ने मुखिया के गुणों पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि
" मुखिया मुख सो चाहिए, खान पान कहूँ एक।
पाले पोसऐ सकल अंग, तुलसी सहित विवेक।।"
अर्थात परिवार या किसी भी समाज का मुखिया हमारे शरीर के मुख के समान होना चाहिए। जैसे मुख भोजन को खाने पीने और चबाने का काम करता है फिर उस भोजन को बिना किसी भेद भाव के शरीर के दूसरे अंगों को पोषित होने के लिए भेज देता है।
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| आदर्श परिवार के मुखिया का चित्र |
लेकिन अब समय के साथ घर के मुखिया के गुणों में बहुत परिवर्तन आ गया है।
बहुत बार लोग यह सोचते हैं कि नई पीढ़ी बिगड़ गई है इसलिए परिवार टूट रहे हैं लेकिन सच यह भी है कि कई बार घर का मुखिया स्वयं ऐसा माहौल बना देता है जिससे लोग घुटन महसूस करने लगते हैं।
जब घर में सम्मान की जगह डर हो, संवाद की जगह आदेश हो और प्यार की जगह अपमान हो तब धीरे धीरे परिवार के लोग बगावत करने लगते हैं।
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परिवार के मुखिया के ये अवगुण पूरे परिवार के कलह का कारण बनते हैं।
1. पक्षपात करना
आज कल हर दूसरे घर में कलह की मुख्य वजह परिवार के मुखिया का पक्षपात पूर्ण व्यवहार है। वे एक बहू या बेटे को ज्यादा महत्व देने लगते हैं जिससे परिवार के दूसरे सदस्यों में असंतोष और इर्ष्या की भावना पनपने लगती है जो आगे चल कर झगड़े और कलह का कारण बनती है।
2. केवल अधिकार जताना
अधिकार से पहले कर्तव्य होता है। केवल अधिकार जताना बेमानी होती है। लेकिन आज कल के मुखियाओं को सिर्फ अधिकार जताना अच्छा लगता है। मैं परिवार में सबसे बड़ा हू इसलिए सभी मेरी बात मानेंगे चाहे बात बिलकुल गलत और पक्षपात पूर्ण क्यों न हो।
वे एक बार भी आपकी राय या सलाह लाना जरूरी नहीं समझते हैं। जबकि परिवार चलाने के लिए सबको साथ लेकर चलना होता है और सबकी बात सुननी जरूरी होती है।
3. खुद गलत आदतें रखना
आज कल के मुखिया खुद तो गलत आदतें नहीं छोड़ेंगे। वे नशा करेंगे और हर काम में आलस भी करेंगे लेकिन अपने बच्चों से एक आदर्श पुत्र/पुत्री की अपेक्षा करेंगे।
अपशब्द और गलत भाषा तो सदैव उनके मुख पर बिराजमान रहती है। उनको इस बात का भी ज्ञान नहीं है कि बच्चे सबसे पहले अपने घर से ही सीखते हैं। आप बोलचाल में जिस भाषा का इस्तेमाल करेंगे बच्चे भी उसी भाषा को सीखेंगे।
4. जिम्मेदारियों से भागना
मैंने स्वयं देखा है जो उम्र बच्चों की खेलने, खाने और पढ़ने की होती है उस उम्र में कुछ माँ बाप बच्चों से काम करवाते हैं। वे बहना बनाते हैं कि वे बीमार हैं, वे थक गए हैं अब उनको काम नहीं करना चाहिए।
वे अपनी आमदनी का मोटा हिस्सा अपने ऐशो आराम पर खर्च करते हैं और परिवार के जरूरी खर्चों जैसे पढ़ाई या राशन से कोई न कोई बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
5. सम्मान न देना
अक्सर बड़े बुजुर्ग मुखिया, आज कल अपने अनुभव के आगे युवा पीढ़ी के विचारों को बचकाना या महत्वहीन समझते हैं। वे स्वयं को सम्मान का पूरा अधिकारी समझते हैं जबकि वे स्वयं छोटे बच्चों और बहुओं का खूब तिरस्कार करते हैं।
6. कान का कच्चा होना
घर का मुखिया यदि कान का कच्चा हो तो कोई भी परिवार में फूट बड़ी आसानी से डाल सकता है। इस बात का फायदा वे चालाक लोग उठाते हैं जो आपके परिवार को खुशहाल नहीं देखना चाहते हैं।
7. फिजूल खर्च
कुछ लोग अपने ऊपर तो भरपूर खर्चा करते हैं लेकिन जब बात आती है परिवार के किसी सदस्य के जरूरी खर्च जैसे पढ़ाई या बिज़नेस की तो वे ऐसे दिखाएंगे कि जैसे उनके पास पैसा नहीं हैं।
उपर्युक्त ये वे अवगुण हैं जो एक आदर्श परिवार के मुखिया में नहीं होने चाहिए।
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नए जमाने के अनुसार, एक आदर्श परिवार के मुखिया में कौन कौन से गुण होने आवश्यक हैं ?
नए जमाने के अनुसार अब परिवार के मुखिया का मतलब सिर्फ हुक्म देना नहीं रह गया है। एक आदर्श मुखिया में सबको साथ लेकर चलने, सबकी बात सुनने और सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए।
परिवार के आदर्श मुखिया में निम्न गुण होना अनिवार्य है।
1. सहानुभूति और धैर्य
बदलते जमाने में परिवार के मुखिया को, परिवार के हर सदस्य की बात बहुत धैर्य पूर्वक सुननी चाहिए। उसे नई पीढ़ी को सोच और भावनाओं का पूरा सम्मान करना चाहिए। अपनी हर बात परिवार के सदस्यों पर जबरदस्ती नहीं थोपनी चाहिए।
2. खुली बातचीत
आर्थिक फैसलों, भविष्य की योजनाओं और परिवार की समस्याओं पर, परिवार के मुखिया को सबसे खुल कर बात करनी चाहिए और सबसे सुझाव मांगने चाहिए। अंतिम निर्णय सोच समझ कर स्वयं लें। इससे परिवार के सदस्यों में मुखिया के प्रति सम्मान और बढ़ जाता है।
3. भेद भाव बिल्कुल नहीं
परिवार के मुखिया को भेद भाव बिल्कुल नहीं करना चाहिए। जिसकी गलती हो उसे फटकार लगानी चाहिए और प्यार से समझाना भी चाहिए। भेद भाव परिवार को तोड़ देता है।
4. खुद की गलती स्वीकार करना
गलती किसी से भी सकती है। जिस परिवार के मुखिया में स्वयं की गलती को स्वीकार करने की सामर्थ्य होगी, उस परिवार में कभी भी अशांति नहीं होगी।
5. तनाव मुक्त मुखिया
एक अच्छे घर के मुखिया को तनाव से निपटना आना चाहिए। जिससे वह बाहर की दुनियां का तनाव घर के दूसरे सदस्यों पर हावी न होने दें। घर के मुखिया को कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच बनाए रखने की आदत होनी चाहिए।
6. तकनीकी जानकारी
आज कल के डिजिटल युग में परिवार के मुखिया को आधुनिक टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा की बेसिक जानकारी होनी चाहिए। इससे वह ऑनलाइन खतरे से परिवार को बचा सकता है और साथ ही जरूरी कामों में हाथ भी बटा सकता है।
7. कही सुनी बातों पर भरोसा नहीं
परिवार के मुखिया को कभी भी दूसरों की बातों पर एक दम यकीन नहीं करना चाहिए। पहले सावधानी पूर्वक बातें सुने फिर सोच समझ कर निर्णय लेना चाहिए।
8. गलत आदतों का त्याग
यदि घर का मुखिया स्वयं शराब, सिगरेट या अन्य किसी गलत आदत का शिकार हो तो क्या वह अपने परिवार के किसी भी दूसरे सदस्य को इसके लिए रोक पाएगा ? शायद नहीं।
इसलिए यदि घर का मुखिया चाहता है कि परिवार के लोग उसका सम्मान करें, उसकी बात मानें तो उसको इन सब गलत आदतों को तुरंत छोड़ देना चाहिए।
9. सदस्यों में डर नहीं, विश्वास बनाए
मुखिया घर में डर का माहौल इसलिए बनाता है ताकि लोग उसकी हर बात मानें और वह परिवार के सदस्यों पर कंट्रोल कर सके।
इससे परिवार के लोग डरते तो है और अनमने मन से बातें भी मानते हैं लेकिन वे अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं।
घर के मुखिया पर परिवार के सदस्यों को इतना भरोसा होना चाहिए कि जब उनको कोई दिक्कत या परेशानी हो तो वे बिना किसी झिझक के अपनी समस्या मुखिया के सामने रख सकें और समाधान भी पा सकें।
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अंत में...
परिवार केवल आदेश या डर से नहीं चलाया जा सकता है बल्कि अच्छे व्यवहार से चलाया जा सकता है। यदि मुखिया स्वयं अनुशासन, सम्मान और संयम का उदाहरण बने तो परिवार अपने आप जुड़ा रहता है।
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