Pehle Log 100 Saal Jeete The, Aaj Kyu Nahi?
क्या गलत कर्म इंसान की उम्र कम कर देते हैं?
क्या गलत सोच और गलत कर्म इंसान के शरीर को अंदर ही अंदर खत्म कर देते हैं ? कलयुग में इंसान की उम्र कम क्यों होती जा रही है ? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो हर इंसान के दिमाग में कभी न कभी जरूर उठते हैं।
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| आज कल लोगों की उम्र कम क्यों हो रही है? |
आज के इंसान के पास सारी सुख सुविधाएं हैं लेकिन फिर भी पहले के मुकाबले व्यक्ति का स्वास्थ्य और उम्र दोनों घट रहे हैं।
महाभारत, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों , पुराणों और कथाओं में कई लोगों की आयु हजारों वर्ष बताई गई है। लेकिन आज के विज्ञान अनुसार एक व्यक्ति की औसत आयु 70 से 85 वर्ष ही है।
पहले इंसान हजारों साल जीता था, अब उम्र कम क्यों हो गई?
धार्मिक दृष्टि कोण।
ग्रंथों और शास्त्रों में बताया गया है कि पहले के लोगों का जीवन सात्विक था। भोजन शुद्ध और प्रकृतिक था। मन शान्त था और प्रकृति प्रदूषण मुक्त थी। लोग तप, योग और संयम को अधिक महत्व देते थे।
कम संसाधन होने की वजह से वे शारीरिक मेहनत ज्यादा करते थे जिससे उनके शरीर का अच्छा खासा व्यायाम हो जाता था। वे सोने जागने से लेकर हर नियम को बखूबी निभाते थे। कुल मिलाकर कर उनका जीवन सादगी से भरा हुआ था।
हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार कलयुग में मनुष्य के अंदर तनाव, क्रोध, लालच, झूठ, कामचोरी, ईर्ष्या, अशुद्ध भोजन और असंतुलित जीवन शैली की वजह से आयु कम होना बताई जाती है।
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वैज्ञानिक दृष्टि कोण।
आज का विज्ञान किसी भी व्यक्ति के हजारों वर्ष तक जीवित रहने के प्रमाण को नहीं मानता है। दिलचस्प और मजेदार बात यह है कि विज्ञान कहता है कि 1900 के दशक में भारत के लोगों की औसत आयु 21 से 32 वर्ष ही होती थी। इसका बड़ा कारण प्लेग, अकाल और स्पेनिश फ्लू जैसे बीमारियां थी। जिसकी वजह से शिशु मृत्यु दर बढ़ गई थी। इसलिए भारत में प्रति व्यक्ति औसत आयु 21 से 32 वर्ष ही थी।
लेकिन आज चिकित्सा सुविधा बेहतर होने से लोग ज्यादा जी रहे हैं। आज भारत के लोगों की औसत आयु 72 वर्ष है।
विज्ञान के अनुसार, जब औसत आयु बढ़ी है तो हमें क्यों लगता है कि लोग ज्यादा मर रहे हैं ?
इसको समझने के लिए हमें निम्न बातों पर ध्यान देना होगा।
1. जनसंख्या विस्फोट: 1900 के दशक में विश्व की जनसंख्या 1.6 अरब थी। जो आज 8 अरब के पार हो चुकी है। जब दुनिया में लोग इतने ज्यादा हो गए हैं तो मरने बालो की संख्या भी ज्यादा दिखाई देगी।
2. दुर्घटनाएं: यातायात के साधनों में बहुत अधिक वृद्धि हो गई है जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। पहले लोग पैदल चलते थे जिससे दुर्घटनाएं नहीं होती थी।
3. बीमारियां: हालांकि विज्ञान ने चिकित्सा क्षेत्र में काफी उन्नति की है। पहले के मुकाबले शिशु मृत्यु दर में भरी कमी आईं है फिर भी अनेकों बीमारियां बढ़ने के कारण लोग नई नई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
4. वृद्ध आबादी की जनसंख्या में उछाल: दुनिया भर में वृद्धों की संख्या ज्यादा हो रही है इसीलिए वृद्धों के मौत की मौत का अकड़ा बड़ा दिखता है।
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वर्ष की गणना के दृष्टि कोण से ।
हो सकता है प्राचीन काल में वर्ष की गणना, आज कल के हिसाब से न होकर किसी दूसरे हिसाब से होती हो।
आध्यात्मिक दृष्टि कोण से ।
ग्रन्थ केवल इतिहास ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक शिक्षा भी देते हैं। यह आपको सही और गलत के अंतर को समझाते हैं।
आज लंबा और स्वस्थ जीवन कैसे संभव है?
स्वस्थ और लंबी उम्र तक जीने के लिए आपको निम्न उपाय करने चाहिए।
- खान पान पर विशेष ध्यान: न ज्यादा खाए , न कम खाए। खाना खाने का बैलेंस होना चाहिए आपकी हेल्थ, उम्र के हिसाब से। ज्यादा खाओगे तब भी बीमार पड़ोगे और कम खाओगे तब भी बीमार पड़ोगे। इसलिए बैलेंस बहुत जरूरी है।
- साफ सफाई का ध्यान: कुछ लोग खाना खाते समय भी हाथ नहीं धोते और जब बीमार होते हैं तो कहते हैं कि हमने तो कुछ ऐसा वैसा नहीं खाया था।
- नियमित व्यायाम और योग जरूर करें।
- तनाव कम करें।
- अच्छी नीद लें।
- समय से जागे।
- अच्छे संबंध और सकारात्मक सोच रखें।
- मोबाइल को प्रति दिन कुछ समय के लिए दूर रखें।
- अच्छे कर्म करें।
- फल और हरी सब्जियां ज्यादा खाए।
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मेरा अपना दृष्टिकोण।
लेकिन मुझे लगता है इन सभी कारणों के साथ साथ व्यक्ति के खुद के कर्मों की वजह से उम्र कम हो गई है।
क्योंकि मैं भगवत गीता पढ़ता हूं तो उसमें एक प्रसंग है कि जब राजा अंग अपने पुत्र वेन के कुकर्मों से दुखी होकर सब कुछ त्याग कर वन को चले गए।
तब ऋषियों ने वेन को राजा घोषित कर दिया । उसके बाद में उसने खूब तांडव मचाया। उसने हवन पूजन के सभी कार्य बंद करा दिए, गरीब लाचारों पर खूब जुल्म करने लगा और स्वयं को सर्वेसर्वा मानने लगा।
ऋषियों ने सोचा कि वेन को राजा बना कर उन्होंने बहुत बड़ी गलती कर दी है।
चलो एक बार वेन को समझाएंगे , समझ गया तो ठीक नहीं तो हम उसे अपने तपो बल से भस्म कर देंगे।
जब ऋषियों ने वेन को समझना चाहा,लेकिन वह नहीं माना। वह कहने लगा कि राजा ही प्रजा का भगवान होता है। इसलिए सभी को हमारी ही पूजा करनी चाहिए।
तब ऋषियों ने उसे अपने तपो बल से नष्ट कर दिया।
बताते हैं उसके बाद ऋषियो ने वेन के मृत शरीर को मथ कर राजा पृथु को उत्पन्न किया जो भगवान विष्णु के अवतार थे। बाद में उन्होंने कई हजार वर्षों तक इस पृथ्वी पर शासन किया।
तो यहां यह सिद्ध होता है कि यदि वेन सही मार्ग पर चलता तो शायद इतनी जल्दी मारा न जाता ।
यह कहानी तो भगवत गीता में लिखी है लेकिन मैने अपनी स्वयं की जिंदगी में यह अनुभव किया है कि जो लोग ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में सही और गलत का अन्तर भूल जाते हैं , अपने कर्तव्यों का सही से निर्वाहन नही करते, वे बिन मौत मारे जाते हैं। उन्हें जिंदगी का असली मतलब समझने का समय ही नहीं मिलता।
बाकी इस विषय पर आपकी क्या राय है, कॉमेंट में हमें जरूर बताएगा।
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