What is Overthinking And How to Overcome Overthinking ?
What is the Meaning of Overthinking in Hindi, And How to stop Overthinking ?
Overthinking को हिंदी में अतिचिंतन या अत्यधिक सोचना कहते हैं। जब आप जीवन में कोई बड़ा फैसला लेते हैं जैसे शादी, रोजगार या किसी कॉलेज में एडमिशन, तब आपके दिमाग में एक साथ अनेकों नकारात्मक और सकारात्मक विचारों का प्रवाह शुरू हो जाता है।
जीवन के मुख्य फैसले बहुत सोच समझ कर लेना जरूरी है लेकिन जब आपके दिमाग में एक ही जैसे कई विचार बार-बार लौट कर आते हैं तो यह आपके अन्य काम को बाधित करते हैं जिससे आपके कार्य करने की शक्ति कम हो जाती है, रात में नीद कम आती है और प्रसन्नता गायब हो जाती है। इसी स्थिति को Overthinking या अतिचिंतन या अत्यधिक सोचना भी कहते हैं।
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👉The Science Behind Overthinking.
कोई भी विचार अनायास रूप से नहीं आता। हर विचार किसी न किसी कारण से कनेक्ट होता है।
उदाहरण -
इसको हम ऐसे समझ सकते हैं। मान लो आप अपने मोबाइल में सुबह 4 बजे का अलार्म सेट कर देते हो, तो सुबह चार बजते ही आपके मोबाइल की घंटी बज जाएगी। और आप जग जाओगे।
लेकिन यदि आप गलती से हर 10 मिनट के अंतराल पर कई सारे अलार्म सेट कर दो तो क्या होगा ?
तो हर 10 मिनट बाद अलार्म बजेगा और आप अलार्म बंद करते करते थक जाओगे और आप नर्वस महसूस करोगे।
अब बताओ गलती किसकी है मोबाइल की या आपकी ?
ग़लती आपने की है गलत तरीके से अलार्म सेट करके।
ठीक इसी तरह का प्रॉसेस आपका माइंड करता है।
जब आप कोई काम करते हैं तो आपका माइंड सजग रहता है और हर चीज को चुप चाप नोटिस करता रहता है।
मान लो आपसे किसी ने कहा , कल आपको मुंबई जाना है तो आपका माइंड तुरन्त एक अलार्म सेट कर देगा और उसका एक विचार बना कर रख लेगा कि आपको बताना है कि कल आपको मुंबई जाना है।
माइंड अब यह भी देखेगा कि मुंबई क्यों जाना है, कितना जरूरी है, और भी बहुत सी चीजों को सोचेगा ।
यदि मुम्बई जाना बहुत जरूरी है तो यह विचार (अलार्म) दिन में कई बार आयेगा ।
यदि आप पहली बार मुंबई जा रहे हैं और डरे हुए हैं तो यह एक साथ कई नेगेटिव और पॉजिटिव थॉट्स को भी जन्म देगा।
यदि जाना कोई निश्चित नहीं, मतलब जाओ या न जाओ तो यह इसको बहुत हल्के में लेगा। और सिर्फ 1-2 बार ही आपको ध्यान दिलाएगा। अगर आपने इग्नोर कर दिया तो फिर यह ध्यान भी नही दिलाएगा।
एक स्थिति और भी हो सकती है यदि आपका मुंबई जाने का बिल्कुल भी मन नही है तो हो सकता है कि यह फिर आपको बिलकुल भी रिमाइंड न कराए।
तो यहां यह क्लियर होता है कि किसी भी काम को आप कितना सीरियस लेते हो और आप के अंदर कितना कॉन्फिडेंस है ?
आपका दिमाग भी वैसे ही विचारों को जन्म देना शुरू कर देगा।
- यदि आप डरे हुए हो तो नेगेटिव थॉट्स ज्यादा आयेंगे।
- यदि आप हर बात को हद से ज्यादा ही सीरीयस लेते हो तो निगेटिव थिंक के साथ साथ ओवर थिंक भी होगी।
- यदि आप अपना हर काम बेहतर तरीके से करते हो जैसे जो सीरियस है उसे सीरियस लेते हो बाकी बेकार की बातों को इग्नोर कर देते हो तो आपका दिमाग भी बेकार की बातों को इग्नोर करना शुरू कर देता है। मतलब Overthinking नहीं करेगा।
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👉मुख्य रूप से Overthinking के दो रूप हते हैं।
- चिंतन
- चिंता
चिंतन: यह विचारों का वह समूह है जहां व्यक्ति अपनी पुरानी यादों में खो जाता है। वह इन विचारों के माध्यम से अपनी पुरानी गलतियों और सुधारों का विश्लेषण करता है। क्या गलत किया और क्या सही किया ? इसका पता चिंतन से ही लगता है। जीवन में चिंतन आवश्यक है।
चिंतन का अर्थ है किसी विचार की गहराई में जाना, ध्यान करना,मनन करना या किसी समस्या का हल ढूंढना।
चिंता: यह नकारात्मक विचारों का वह समूह होता है जिनमें भय, घबराहट और बेचैनी भरी होती है। ये वे विचार होते हैं जो वास्तविकता से कम और डर से ज्यादा उत्पन होते हैं। ये विचार ज्यादातर भविष्य से जुड़े होते हैं। जब इन्हीं विचारों को आप चाह कर भी नही हटा पाते तो तो इस स्थिति को अतिचिंतन या Overthinking कहते हैं।
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👉Overthinking kills your happiness
Overthinking या अतिचिंतन से व्यक्ति के जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ता है। रात को सोने से पहले यदि आपका दिमाग शांत नहीं होता तो आप Overthinking के शिकार हो सकते हैं। यह धीरे धीरे आपसे खुशियां छीन लेगा। जब कोई व्यक्ति Overthinking का शिकार हो जाए तो उसमें निम्न लक्षण दिखाई देंगे।
- व्यक्ति की मानसिक शांति भंग हो जाती है।
- रात में नीद कम आती है।
- व्यक्ति चिंता से घिरा रहता है।
- शरीर से कमजोर होने लगता हैं।
- व्यक्ति खुश नहीं रहता।
- वह डरा डरा सा रहता है।
- हर समय विचारों में खोया रहता है।
- सही निर्णय नही ले पता।
- पुरानी गलतियों पर बार बार फोकस करता है।
- भविष्य की हर समय चिंता करता।
👉How to stop overthinking
Overthinking रोकने के लिए आप निम्न उपाय कर सकते हैं।
- दिमाग को व्यस्त रखो: कहते हैं "खाली दिमाग शैतान का घर"। दिमाग का काम है विचारों को जन्म देना। इसलिए जब भी माइंड खाली हो तो कोई ऐसा काम शुरू कर दो जिससे इसको अपने अतीत में लौटने का मौका ही न मिले। यानि पुरानी बातें न सोच पाए। इसके लिए आप कोई खेल, खेल सकते हो या हंसी मजाक के वीडियो देख सकते हो या फिर चुटकले पढ़ या सुन सकते हो। मतलब माइंड को डायवर्ट करना है ।
- विचारों को लिखना: यदि आप विचारों को लिखने लगते हों तो फिर आप उन्हें देख भी सकते हो और यह समझ सकते हो कि कौन सा विचार सही है और कौन सा गलत। इससे गलत विचार ऑटोमेटिक डिलीट होने लगेंगे।
- सही और गलत विचार में फर्क: विचार तो आयेंगे उन्हें रोक नहीं सकते, बस जो सही है उस पर ध्यान दो, बाकी को इग्नोर करो।
- छोटी छोटी बेकार की बातों को इग्नोर करना सीखें: Overthinking के शिकार वे लोग ज्यादा होते हैं जो हर छोटी सी छोटी बात पर बहुत ध्यान केंद्रित करते हैं। बेकार के कचड़े को दिमाग में बिल्कुल जगह न दें।
- चिंतन करें , चिंता नहीं: चिंतन करने से प्रॉब्लम का सॉल्यूशन मिलता है, चिंता करने से हमें घबराहट महसूस होती हैं।
- चुप रहने की आदत डालें: कई बार ज्यादा बोलने से मुख से कोई ऐसा शब्द निकल जाता है जो दूसरे को खराब लग सकता हैं। इन सब बातों को माइंड साइलेंटली सुनता रहता है और फिर नए विचारों को उत्पन्न करता रहता है। जोकि Overthinking का कारण बनता है।
- भविष्य की चिंता: जो होना है वह हो कर रहेगा। बहुत सी चीजें हमारे कंट्रोल में नहीं होती। उन सब के बारे में सोचना छोड़ दें।
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