Kaam karne ka man na kare to kya kare
काम करने का मन न करे तो क्या करें ? जानिए सबसे सरल उपाय जो आपकी जिंदगी बदल देगा।
क्या आपका काम करने में बिल्कुल मन नहीं लगता ? अर्थशास्त्र का तुष्टिगुण सिद्धांत बताता है इसका असली कारण। आइए इसको डिटेल में समझते हैं।
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| काम में आलस क्यों आता है ( Ai चित्र ) |
काम में रुचि क्यों खत्म हो जाती है? सीमांत तुष्टिगुण हास नियम क्या कहता है ?
अर्थशास्त्र में तुष्टि गुण का एक नियम है जिसे उपयोगिता का नियम भी कहते हैं। तुष्टि गुण का अर्थ किसी भी वस्तु या सेवा से मिलने वाली संतुष्टि से है।
इसी तुष्टि गुण से जुड़ा एक और नियम है जिसे सीमान्त तुष्टि गुण हास नियम कहते हैं। जिसका अर्थ है किसी भी वस्तु या सेवा के लगातार उपभोग करने से उस वस्तु या सेवा से मिलने वाली संतुष्टि घटती जाती है।
और फिर एक समय ऐसा आता है जहां पर वह वस्तु या सेवा आपको नाकारात्मक संतुष्टि देती है या कहें असंतुष्ट करने लगती है।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं।
मान लो आपको भूख लगी है और आप रोटी खाने बैठ जाते हो तो आपको पहली रोटी के बाद मिलने वाली सभी रोटियों से संतुष्टि घटते हुए क्रम में मिलगी।
रोटियां संतुष्टि
- पहली रोटी = 10
- दूसरी रोटी = 08
- तीसरी रोटी = 06
- चौथी रोटी = 04
- पांचवीं रोटी = 02
- छठी रोटी = 00
- सातवीं रोटी = -02
- आठवीं रोटी = -04
देखा आपने, पहली रोटी से यदि 10 तुष्टि गुण मिलता है तो दूसरी में 8 रह जाएगा, तीसरी से 6 तुष्टिगुण प्राप्त होगा। छठी रोटी पर आपको पूर्ण संतुष्टि मिल जाएगी।
यानि छठी रोटी के बाद आपका मन बिल्कुल भी रोटी खाने का नहीं करेगा। अब इसके बाद यदि आप सातवीं या आठवीं रोटी खाते हो तो आपको पेट में दर्द या कोई अन्य समस्या हो सकती है।
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काम में मन क्यों नहीं लगता?
अर्थशास्त्र का सीमांत तुष्टिगुण हास नियम ( Law of Diminishing Marginal Utility ) हमारे रोज के कामों पर भी लागू होता है। काम में एकरूपता आने पर, काम में रुचि कम होने लगती है। जब आप पहली बार किसी काम को करते हो तो आपका तुष्टि गुण हाई लेवल पर होता है।
यदि उस काम को लगातार एक ही तरीके से करते रहेंगे या उसमें कोई फेर बदल नहीं होगा तो काम में नीरसता आएगी यानि तुष्टि गुण का हास होगा।
सप्ताह के अंत में एक छुट्टी इसीलिए रखी जाती है जिससे आप अपने प्रतिदिन के काम से बोर न हो। आप कुछ नया करें, घूमने जाये या नया कुछ सीखें। यानि तुष्टि गुण बना रहे। जब तक तुष्टि गुण का हास नहीं होगा, आपके अपने काम में रुचि बनी रहेगी।
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काम में दिलचस्पी कैसे पैदा करें ?
इतनी बात तो समझ में आ गई कि काम में बोरियत क्यों महसूस होती है तो अब ऐसा क्या करें कि काम में फोकस बना रहे।
यहां हम नीचे कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जिनको आप करेंगे तो काम में कभी भी बोरियत महसूस नहीं होगी। मतलब आपके काम में तुष्टि गुण बना रहेगा। आप काम को बोझ समझ कर नहीं बल्कि अपनी खुशी से करेंगे।
1. कर्म करो, फल की चिंता मत करो: भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि " कर्म करो, फल की चिंता मत करो"। कोई भी कर्म यदि फल की आशा से करोगे तो जल्दी थक जाओगे लेकिन यदि उसी काम को अपना कर्तव्य समझ कर करोगे तो काम में कभी बोरियत महसूस नहीं होगी।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं।
मान लो मै पोस्ट लिख रहा हूं और मैं सोचूँ कि यह पोस्ट वायरल होगी लेकिन जब किसी कारण बस यह पोस्ट वायरल नहीं हुई तब मैं निराश हो जाऊंगा। मैंने इस पोस्ट से जितनी संतुष्टि यानि तुष्टि गुण की आशा की थी उतनी संतुष्टि तो मुझे नहीं मिली।
अब आगे क्या होगा? मैं मायूस हो जाऊंगा। अगली पोस्ट फिर लिखूंगा लेकिन मन में कोई खास जोश न होने के कारण कोई अच्छा टॉपिक या कॉन्टेंट नहीं बना पाऊंगा। यदि पोस्ट फिर से वायरल नहीं हुई तो कष्ट दोगुना हो जाएगा। ऐसा क्रम कई बार होगा और एक दिन मुझे पोस्ट लिखने में बोरियत महसूस होने लगेगी। मैं पोस्ट लिखना ही बंद कर दूंगा।
इसके विपरीत यदि हम यह सोच कर पोस्ट लिखें कि मेरा काम तो अच्छी पोस्ट लिखना है, लोगों का भला करना है। फल यानि पोस्ट का वायरल होना तो ईश्वर के हाथ में है। फिर यदि यह पोस्ट वायरल नहीं हुई तो मुझे कोई खास दुख या बोरियत नहीं होगी।
फल की चिंता या अपेक्षा करने से फल नहीं मिल जाता। हमारे हाथ में सिर्फ कर्म यानि अच्छी पोस्ट लिखना है बाकी फल यानि पोस्ट का वायरल होना हमारे हांथ में नहीं है और जो चीज हमारे हांथ में न हो उसे ईश्वर के हाथ में ही सौंप देना ही ठीक रहता है।
2. नियत: भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि "तुम पक्का भरोसा रखो, जिस नियत से तुम कर्म करोगे, उसी के हिसाब से तुम्हें फल अवश्य मिलेगा।" नियत यदि ठीक होगी तो परिणाम भी बेहतर ही होंगे। ऐसा सोचने से आप भविष्य के प्रति ज्यादा चिंतित नहीं होंगे और आप अपने काम में मन लगा सकेंगे।
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3. स्वास्थ्य का ध्यान रखें: स्वास्थ्य यदि ठीक नहीं होगा तो भी काम में मन नहीं लगेगा। कोई समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
4. देर रात तक मोबाइल चलाना: रात में ज्यादा देर तक मोबाइल यूज़ करने से एक तो नीद पूरी नहीं होती दूसरे दिमाग जल्दी थक जाता है। जिससे अगले दिन काम करने का मन नहीं करता है। मोबाइल का सिर्फ जरूरत भर उपयोग करें।
5. नीदं पूरी न होना : ओवरथिंकिंग या किसी अन्य वजह से जब नीद पूरी नहीं होती तो भी काम करने का मन नहीं करता। एक व्यक्ति को एक दिन में कम से कम 7-8 घंटा सोना जरूरी है।
6. सुबह जल्दी न उठना : सुबह की हवा में असीम ऊर्जा होती है। यदि आप देर से बिस्तर से उठते हो तो वह कीमती ऊर्जा आप गवा देते हो। सुबह की धूप की किरणों में विटामिन डी पाया जाता है जो आप मिस कर देते हो। विटामिन डी की कमी से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इससे भी काम करने का मन नहीं करता। अतः सुबह जल्दी उठने की आदत बनाए।
7. लक्ष्य जरूर बनाए: अपने जीवन में एक लक्ष्य जरूर बनाए। लक्ष्य को जब हम याद करते हैं तो काम करने का मोटिवेशन मिलता है।
8. व्यायाम न करना : सुबह उठ कर 30-40 मिनट का व्यायाम पूरे दिन एक्टिव रखता है और कई प्रकार की बीमारियों से भी दूर रखता है।
9. अच्छा पौष्टिक भोजन न करना : जितना हो सके पैक्ड फूड से बचें। अच्छा साफ स्वच्छ घर का बना भोजन करें। कहावत है जैसा खाओ अन्न, वैसा बने मन। स्वच्छ भोजन करने से मन शांत होता है और काम में मन लगता है।
10. साफ सफाई का ध्यान न रखना : साफ सफाई से मन पवित्र होता है और कॉन्फिडेंस बढ़ता है। काम करने का मन करता है।
11. गलत संगति में पड़ जाना : आलसी और निकम्मे लोगों का साथ छोड़ दे। अच्छे लोगों की संगति करें। गलत संगत का दिमाग पर बहुत जल्दी असर पड़ता है।
12. काम को एक ही रूटीन में लगातार करते रहना : काम को नए नए एंगल से करने की आदत बनाए। इससे कुछ नया सीखने को मिलता है और काम करने का मन करता है। समय समय पर अवकाश जरूर लें।
13. ग्रह क्लेश होना : ग्रह क्लेश की वजह से भी लोग कभी कभी काम छोड़ कर बैठ जाते हैं। अपने काम पर फोकस करें। यह समस्या तो अब लगभग हर घर में होती है।
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14. अच्छी किताबें न पढ़ना : जब खाली समय मिले तो अच्छी किताबें पढ़ें या हमारे इस ब्लॉग पर आकर अच्छी अच्छी पोस्ट पढ़ें और अपना ज्ञान बढ़ाए। इससे मन हमेशा सकारत्मक ऊर्जा से भरा रहेगा और काम में खूब मन लगेगा।
15. टाल मटोल की आदत बना लेना : काम को लेकर ताल मटोल की आदत न बनाए। जो भी काम सामने आए उसे तुरन्त निपटाने की कोशिश करें।
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